Tuesday, March 31, 2020

तो यही है वह तीन विकार जिससे आदमी हो जाता है बर-र्बाद : The Lord Krishna

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5000 साल पहले भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता में इंसान की बर्बादी के सिर्फ तीन ही कारण बताए थे। आज जितने भी गुनाहगार क्रिमिनल जेल में मिलेंगे वह सभी सिर्फ इन्हीं तीन कारणों की वजह से जेल में बंद है।
दोस्तों इस ब्लॉग में हम आपको इन्हीं तीनों विकारों के बारे में बताएंगे इसके बाद आप खुद पर एक नजर डाल दीजिएगा कि कहीं यह तीनों विकार आप में तो नहीं अगर ऐसा है तो सावधान इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें भगवान श्री कृष्ण के द्वारा दिए गए ज्ञान को पूर्ण रूप से जानने के लिए ।
तो पहले आते हैं एक कहानी पर प्राचीन काल में एक शाही परिवार में एक लड़के का जन्म हुआ। कम उम्र में शाही ठाठ बाट से दूर उसे गुरुकुल में भेज दिया गया। गुरुकुल में वह विद्यार्थी सबसे होनहार था। उसने वेदों और शास्त्रों का अध्ययन किया गुरुकुल में उसकी शिक्षा समाप्त भी नहीं हुई थी। उसके माता-पिता भाई-बहन सभी प्राकृतिक आपदा में मारे गए ना तो राजसी ठाठ बाट रहा ना ही मां-बाप। शिक्षा समाप्त होने के बाद इस विद्यार्थी ने प्रण लिया कि उसका सारा जीवन लोगों की सिर्फ भलाई में गुजरेगा और उसने संयास ले लिया सन्यासी ने इतनी सारी महत्वाकांक्षा त्याग दी और वह ध्यान लगाने सांसारिक चीजों को त्याग कर हिमालय के घने जंगलों में चला गया। वहां पर उसने लंबे समय तक तपस्या की और अपने दिमाग की शक्तियों को विकसित किया सन्यासी अपने जीवन में बहुत खुश था लोग शिक्षा लेने के लिए उसके पास आते थे और यह सन्यासी उनकी समस्या सुलझाने में लोगों की मदद करता था। 


धीरे-धीरे इस सन्यासी की चर्चा पूरे नगर में होने लगी सन्यासी बहुत मशहूर होने लगा और उस राज्य का राजा बहुत ही क्रूर व्यक्ति था और राजा ने सन्यासी से मिलने की ठान ली पहली मुलाकात से राजा सन्यासी से इतना प्रभावित हुआ की उसने अच्छाई की राह पर चलने की ठान ली। राजा मन ही मन सोचने लगा अगर यह सन्यासी चंद मिनटों में हमें बदल सकता है अगर यह मेरे पास रहने लगे तो मेरी तो जिंदगी ही बदल जाएगी। इसकी सेवा से मेरा जीवन धन्य हो जाएगा राजा ने सन्यासी से महल में चलने का आग्रह किया। सन्यासी इसके लिए मान गया और राजा सन्यासी को लेकर महल में पहुंच गया। वहां राजा ने सन्यासी को साही कमरे में भोजन करवाया सन्यासी ने राजा का धन्यवाद किया और जाने की आज्ञा मांगी। राजा ने कहा आप हमारे बगीचे में हमेशा के लिए रह सकते हैं मैं आपकी जरूरत की सभी वस्तुएं खाना रहना कपड़ा इत्यादि का प्रबंध करवाता हूं। सन्यासी ने राजा के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। बगीचे में सन्यासी के लिए एक कुटिया बना दी गई। सन्यासी काफी साल वही रहे राजा ने भी सन्यासी की खूब सेवा की।कुछ सालों बाद राजा और रानी पड़ोस के एक राज्य में चले गए और एक सेवादार को सन्यासी की सेवा करने के लिए बोल गए लेकिन सेवादार बीमार पड़ गया। और अगले दिन से नहीं आया।सन्यासी को अब ना तो कोई भोजन देने वाला था और ना ही सेवा करने वाला। कुछ दिनों बाद जब राजा वापस लौटे तो सन्यासी ने राजा को खूब डांट लगाई और कहा गैर जिम्मेदारी की भी कोई हद होती है जब तुम मेरी जिम्मेदारी उठा ही नहीं सकते थे तो ली ही क्यों भला राजा ने सन्यासी से क्षमा मांगी फिर भी सन्यासी ने राजा को बहुत डांट लगाई फिर थोड़ी देर बाद मामला सब शांत हो गया रानी भी यह सब चुपके से सब देखती रही पर शांत रही। फिर कुछ दिन बाद राजा को किसी अन्य काम से बाहर जाना पड़ गया इस बार राजा ने रानी को निर्देश दिया जब तक मैं वापस नहीं आता हूं तब तक आप सन्यासी की सभी जरूरतों का ध्यान रखेंगी
1 दिन रानी नहाने गई और सन्यासी को भोजन देना भूल गई सन्यासी ने थोड़ा इंतजार किया जब भोजन नहीं आया सन्यासी सोच में पड़ गया सन्यासी ने खुद सोचा कि महल में जाकर देखें सन्यासी की नजर रानी पर पड़ी उसने रानी के अद्भुत रूप को देखा जिसको देखकर सन्यासी चकित रह गया रानी की सुंदरता सन्यासी के मन में घर कर गई सन्यासी सुंदरता को भुला नहीं सका वह खाना पीना छोड़ कर अपने उसी कुटिया में पड़ा रहा उसने अगले दिन कुछ भी नहीं खाया सन्यासी बहुत कमजोर हो गया था फिर कुछ समय बाद राजा वापस लौट आया राजा को सन्यासी के हाल का पता लगा राजा सीधा सन्यासी के पास पहुंच गए राजा ने सन्यासी से कहा आप बहुत कमजोर हो गए हैं आप बहुत गहरी सोच में डूबे हैं इसका क्या कारण है मुझसे फिर कुछ भूल हो गई है सन्यासी ने बताया वो राजा मैं आपकी रानी के अद्भुत सुंदरता के मोह में पड़ गया हूं और रानी के बिना जिंदा नहीं रह सकता राजा ने कहा मेरे साथ मेरे महल चलिए मैं आपको रानी दे दूंगा और फिर राजा सन्यासी को लेकर महल चला गया रानी ने अपने सबसे सुंदर गहने और कपड़े पहने हुए थे राजा रानी के पास पहुंचे और कहा आपको सन्यासी की मदद करनी चाहिए वह बहुत कमजोर पड़ गए हैं और मैं नहीं चाहता किसी ज्ञानी पुरुष की हत्या का पाप अपने सर पर लूं राजा ने रानी से पूछा क्या आप यह पाप अपने सर पर लेना चाहती हैं सन्यासी आपकी अद्भुत सुंदरता के दीवाने हो गए हैं रानी ने कहा मैं समझ गई कि हमें क्या करना है और फिर राजा ने रानी को सन्यासी को सौंप दिया सन्यासी जब रानी को लेकर कुटिया के दरवाजे पर पहुंचा तो रानी ने सन्यासी से कहा हमें रहने के लिए घर चाहिए सन्यासी तुरंत राजा के पास गया और बोला राजा हमें रहने के लिए घर चाहिए राजा ने उनके लिए घर का प्रबंध किया सन्यासी जब रानी को लेकर घर पहुंचा तो रानी ने कहा घर तो बहुत गंदा है इसकी तो हालत बहुत खराब है सन्यासी फिर राजा के पास पहुंचा और कहा करके हालत बहुत खराब है राजा के हुक्म से घर को ठीक करा दिया गया रानी नहा धोकर बिस्तर पर बैठ गई और सन्यासी भी रानी के पास आ गया रानी ने सन्यासी से कहा क्या आपको पता नहीं कि आप कौन थे और क्या बन गए हैं आप एक महान सन्यासी थे जिसके लिए राजा स्वयं जरूरतों की सारी सुविधा उपलब्ध करवाता था और आज आप वासना के कारण मेरे गुलाम हो गए हैं यह सुनकर सन्यासी को महसूस हुआ वह तो एक सन्यासी है जो अपनी सारी सुख-सुविधाओं को त्याग कर शांति की तलाश में जंगलों में चले गए थे सन्यासी को इतना एहसास होते ही जोर जोर से चिल्लाने लगा और रानी से हाथ जोड़ कर कहने लगा महारानी मुझे माफ कर दीजिए महारानी मैं उस दयालु राजा की रानी को अभी सौंप कर आता हूं रानी ने प्रश्न किया महाराज जब उस दिन आप को भोजन नहीं मिला आप बहुत क्रोधित हो गए थे मैंने आपका वह रूप पहली बार देखा था तभी से आपके व्यवहार में परिवर्तन महसूस किया सन्यासी ने उसे समझाया कि जब मैं जंगल में था तो मुझे समय पर खाना पीना भी नहीं मिलता था पर महल में आने के बाद मुझे भरपूर सुविधाएं मिली और मैं इसके मोह में फस गया मुझे इसके प्रति लगाव उत्पन्न हो गया फिर इसको पाने का लालच हुआ जब मुझे यह नहीं मिला तो मुझे क्रोध उत्पन्न हुआ सच यह है कि "इच्छा पूरी नहीं होती है तो क्रोध उत्पन्न होता है कि क्यों नहीं पूरी हुई और अगर पूरी हुई तो लालच अत्यधिक बढ़ जाता है" तब सन्यासी ने बताया कि यही इच्छाओं की पूर्ति मुझे इस वासना के द्वार तक ले आई और मैं आपके प्रति आकर्षित हो गया इसके बाद सन्यासी को समझ में आ गया कि मुझे वापस जंगलों में लौटना चाहिए और ठीक उन्होंने वैसा ही किया।
दोस्तों श्रीमद्भागवत गीता के 16 अध्याय के 21 वें श्लोक में स्वयं भगवान कृष्ण ने नरक के तीन द्वार बताएं हैं और यह तीन द्वार हैं काम, क्रोध और लोभ (लालच) अब जरा सोच कर देखिए जितने भी क्राइम इस दुनिया में होते हैं वह सब इन्हीं तीनों से सम्बंधित रहते हैं दोस्तों जितना हो सके इस ब्लॉग को शेयर करिए और यदि किसी को भी इन तीन विकारों में से अगर कोई भी विकार उसके अंदर आ जाता है तो वह जीवन के अंतिम द्वार पर पहुंच जाता है।  
।।धन्यवाद।।
अगर आप कोई सुझाव या किसी भी प्रकार की कोई जानकारी देना चाहते है तो आप हमें मेल (contact@hindimehelppao.com) कर सकते है या Whatsapp  (+919151529999) भी कर सकते हैं| 
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