Thursday, April 9, 2020

ऐसे ही नहीं बन गया था दुनिया का सबसे पॉपुलर महागाथा "रामायण " रामानंद सागर जी को इनसे भी निपटना पड़ा था : RAMAYANA

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रामायण की कहानियाँ 


तमाम कठिनाइयों के बीच में कैसे रामानंद सागर जी ने बनाया था "रामायण" जैसा महागाथा

दोस्तों ये बात उस समय की है जब इंदिरा गाँधी के द्वारा लगायी गयी  इमरजेंसी ने "सेकुलरिज़्म" को जन्म दे दिया था। इधर भारतीय सिनेमा में दुबई माफियाओं की दखलंदाजी बढ़ती जा रही थी। रामानंद सागर जी स्विट्जरलैंड की कड़कड़ाती ठंड में फिल्म चरस को शूट करने में व्यस्त थे,और यहाँ भारत में धीरे धीरे टेलीविजन का दौर शुरु हो चुका था, वही एक घटनाक्रम पूर्णरुपेन सेट हो रहा था।
स्विट्जरलैंड में एक रोज सागर जी शूटिंग से जल्द फ्री होकर कहने लगे  कि मैं  सिनेमा छोड़ रहा हूँ। और गाँव में (टेलीविजन इंडस्ट्री) बनाने का इरादा है। ताकि मैं सुकून से त्रेता और द्वापर युग को इस कलयुग में रचकर देख सकूँ, और मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम व नटखट श्री कृष्ण को उनमें आने का आग्रह कर सकूँ, इसके लिए माँ दुर्गा के आर्शीवाद की सख्त जरूरत होगी। अब यही मेरी ज़िंदगी का मकसद है।
सागर जी ने त्रेता और द्वापर युग रचने से पहले, टेलीविजन इंडस्ट्री की तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक सीरियल तैयार किया जिसका नाम था  "बैताल पच्चीसी"  क्योंकि सागर जी त्रेता युग के लिए आर्किटेक्ट को कॉन्ट्रैक्ट दे दिया था। टेलीविजन इंडस्ट्री में जब  "बैताल पच्चीसी" आई और सागर जी को अपनी रिपोर्ट से अवगत करवाया कि साब आपके त्रेता युग को रचने में आर्थिक तौर पर काफी अड़चनें आनी है। क्योंकि कलयुग में त्रेता युग को लेकर लोगों में ज्यादा दिलचस्पी दिखलाई नहीं पड़ती है। सागर जी के दोस्त भी हाथ पीछे खींच चुके थे।
दोस्तों लेकिन कहते है कि ना इंसान जब दृढ़ निश्च्य कर ले। तो सारी कायनात जुट जाती है, उसको पूरा करने में। बहुत सी आर्थिक दिक्कतों के बाद सन 1985 में त्रेता युग का काम शुरू किया गया।

रामायण की कहानियाँ 
चूंकि कलयुग, ऊपर से सेकुलरिज़्म का चोला ओढ़ चुका था। इसलिए दिल्ली के गलियारों में एक तूफान उठने को उतारू था। और यह तूफान एक लेटर के रूप में सागर जी के दरवाजे पर पहुँचा। दरसअल यह लैटर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव एसएस गिल का था। उन्होंने सागर जी से कहा कि हम चाहते है कि त्रेता युग मे काफी नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश है। इसलिए हम इसे भारतीय धर्मनिरपेक्ष परिपेक्ष्य में कैसे प्रजेंट कर सकते है। इसका पायलट कॉन्सपेट एपिसोड्स सर्वप्रथम मुझे दें।
सागर जी ने लैटर स्वीकार कर लिया। और पालयट एपिसोड्स मंडी हाउस में जमा करवा दिए। उधर दूरदर्शन में अधिकारियों के बीच बहस हो चली थी। क्योंकि त्रेता युग के कॉन्सपेट को देख। तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री बीएन बार्डगिल की घोर आपत्ति दर्ज हुई। बार्डगिल का मत था कि भारतीय सेकुलरिज़्म में यह हिन्दू पौराणिक सांस्कृतिक त्रेता युग हिन्दू शक्ति को जन्म दे सकता है। भारत के सेकुलरिज़्म में हिन्दू शक्ति केंद्र में आ सकती है। और इससे विपक्षी पार्टी बीजेपी हिन्दू भावना जागृत करते हुए। सत्ता में पहुँच सकती है। कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। और बीजेपी का वोट बैंक बढ़ सकता है। बार्डगिल की आपत्ति को दूसरे कांग्रेस नेताओं का भी समर्थन प्राप्त हो चला।
सूचना प्रसारण मंत्रालय और डीडी के अधिकारियों की बहस में सागर जी ने मंडी हाउस स्थित डीडी हैड क्वाटर के खूब चक्कर काटे। काफी दिनों से इंतज़ार करते हुए होटल में पड़े रहे। कि किसी अधिकारी का कॉल आएगा। सागर जी मिलने का समय लेने के लिए भी अधिकारियों के दफ्तर के बाहर खड़े रहे। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सागर जी को एक चपरासी ने बताया कि आपके पायलट एपिसोड एक हो चले है। बहस में कॉन्सेप्ट के भाषा, परिवेश पर काफी बाते हुई। डायलॉग को लेकर भी काफी तंज हुए। दरसअल एक डीडी अधिकारी ने कहा कि यह हमारे सांस्कृतिक महाकाव्य पर आधारित है। इसलिए इसका धार्मिक होना जरूरी नही है। खुद वाल्मीकि ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का वर्णन एक इंसान के तौर पर किया है। जब बहस ने तूल पकड़ लिया तो इसी बीच ये मामला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पास गया। तब उन्होंने इस कॉन्सेप्ट के प्रसारण का आदेश दिया।
सागर जी की काफी गहन तपस्या के बाद कलयुग में रचित त्रेता युग मे राम उतरे। मतलब राम को तुच्छ इंसानों से परमिट लेना पड़ा। संगीत के महान ज्ञाता रवींद्र जैन जी की बेहत मार्मिक आवाज और संगीत  ने राम के दर्शन हेतु देश मे ऐसा मजमा लगा। कि गांव, शहर की सड़कें, गलियां चौबारे, सुनसान होकर। स्वघोषित जनता कर्फ़्यू में तब्दील हो चला। और जब राम मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के सफर की ओर अग्रसर हुए। राम को वन जाते देख। कलयुगी लोग अपने राम को देख इस कदर रोये कि अश्रुओं की धाराएं नदी में परिवर्तित हो चली। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या जवान, क्या औरतें। सबकी आंखे अश्रुओं की गवाह बनी।

त्रेता युग मे रामराज को देखने वाली का तांता लग गया था। देश छोड़कर लोकप्रियता सीमाएं लांघ चुकी थी। टीवी बॉक्स मन्दिर हो चला था। समर्द्ध लोग इस मंदिर को घर लाने को उतारू नजर आने लगे। सारे रिकॉर्ड टूट चुके थे। सागर जी ने कलयुग में ऐसा त्रेता युग क्रिएट किया कि तैतीस साल बाद देश के लॉक डाउन में जाने के बाद लोगों ने इसके पुनः प्रसारण की मांग कर डाली। इधर सूचना प्रसारण मंत्रालय ने भी मांग को तुरन्त स्वीकारते हुए। इसके टाइम स्लॉट की जानकारी सांझा कर दी।

अब बात करते है रामायण के प्रमुख किरदारों को निभाने वालों की 
दोस्तों जब बात आती है किरदारों की तो मुख से सिर्फ एक बात निकलती है सुपर से भी ऊपर दोस्तों रामानंद सागर जी ने एक एक पात्र का चुनाव इस तरह से किया था जिसका शब्दों में वर्णन करना असंभव है। भारत की आम जनता इन किरदारों में इस कदर खो गयी थी की रामायण के शुरु होने पश्चात् यदि रामायण का कोई पात्र कही भी यात्रा पर जाता था तो लोग उन्हें उसी रूप में देखते थे, इसी तरह प्रभु श्री राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल जी ने एक घटना का अभी हाल में ही "The Kapil Sharma Show" में किया, कि  वो तमिलनाडु में किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, शूटिंग के पश्चात रिलैक्स होने के लिया सेट पर ही परदे के पीछे एक सिगरेट जलाकर पीने लगे इसी बीच एक आदमी आया उन्हें देखकर कुछ बड़बड़ाने लगा , लेकिन गोविल जी को कुछ समझ में नहीं आया की ये क्या बोल रहा है, उन्होंने अपने अस्सिस्टेंट को आवाज दिया कि देखो ये महाशय मुझ पर किस बात के लिए बहस कर रहे  है , इस पर उनके अस्सिस्टेंट ने उन्हें बताया कि वो यह कह रहे है कि आपको तो हम प्रभु श्री राम समझते है और आप सिगरेट पी रहे है आपको शर्मा नहीं आती है, ये बात गोविल को इतना लगी की उन्होंने उसी क्षण ये प्रण  लिया कि आज  बाद कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाऊंगा और आज तक नहीं लगाया। ये तो सिर्फ एक वाक़या था ऐसे न जाने कितनी बातें घटित होती थी उन दिनों , तो दोस्तों ऐसे सभी मुख्य किरदार के नाम व पात्र नीचे दिया है जिस पर आप क्लिक करके आप उनके बारे में जान सकते है--
अभिनेता/अभिनेत्रीपात्र
अरुण गोविलश्रीराम
दीपिकासीता
सुनील लहरीलक्ष्मण
संजय जोगभरत
समीर राजदाशत्रुघ्न
दारा सिंहहनुमान
बाल धुरीदशरथ
जयश्री गडकरकौशल्या
रजनीबालासुमित्रा
पद्मा खन्नाकैकयी
ललिता पवारमन्थरा
अरविन्द त्रिवेदीरावण
विजय अरोड़ाइन्द्रजीत
मुलराज राजदाजनक
सुधीर दाल्वीवशिष्ठ
चंद्रशेखरसुमंत्र

तो दोस्तों ये थी रामायण जैसे महान धारावाहिक बनने के पीछे का कुछ रोचक तथ्य जिसको मैंने आपसे साझा किया ऐसे ही और रोचक जानकारी के लिए हमारी वेवसाइट पर निरंतर आते रहिये और अपने दोस्तों के साथ साझा करना न भूलिए। धन्यवाद


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